वह आता दो टूक फेसबुक के करता, फेकबुक बनाता अपनी थुलथुल काया लेकर वापिस चला जाता
वह आता दो टूक फेसबुक के करता
लाइक करता, टिप्पणी धरता
पोस्ट कभी न लगाता
जहां फंसाता, वहीं खुद फंस जाता
कहीं चेहरा सजाता सलमान का
कहीं चेहरा छिपाता अपने मेहमान का
वह आता दो टूक फेसबुक के करता
लुक अपना लड़के से लड़की में बदलता
खूब पसंद पाता
वाह वाह से मन भर जाता
टिप्पणी अपने घर भी ले जाता
अपनी पत्नी से छिपाता
बच्चों को भी नहीं बताता
भरमाता, दो बच्चों का पिता
खुद को सबसे सुंदर समझता
ताकत से अपनी खुद को खुदा समझता
लड़कियों को लुभाता
प्रशंसा में फेक गीत गाता
तब भी किसी को न भाता
चुराकर किसी की कविता
कर अनुवाद अपनी बताता
विचार चुराकर लाता
कभी किसी के, कभी किसी के
अपनी दीवार पर
अपनी टाइम लाईन पर
अपने ब्लॉग पर कतार में
अधेड़ महिलाओं की लाईन लगाना
जहां कन्या स्वरूपा बनता
लाईन पुरुषों की
अधेड़ों की लगी पाता
झुंझलाता, दांत पीसता
गर्व उसका यूं ही पीस जाता।
वह आता दो टूक फेसबुक के करता
कदम अपने ब्लॉग पर लाके धरता
धरती पर कभी न टिकता
जिम में जाकर दम उसका मचलता
सामने आने पर सारा यूं ही निकलता।
वह आता फेसबुक को
फेकबुक बनाता
बनाता या खुद बन जाता
वह जाता
वह जाती
दूर से काया इकहरी
एक ककड़ी, एक खीरा नजर आती
वह चिल्लाती उसे अपना खसम बनाती
फेसबुक पर खाता अपना खोल न पाती
सारी उम्र यूं ही जुल्म उठाती
फेसबुक पर टिप्पणी पाने को तरस जाती।
लाइक करता, टिप्पणी धरता
पोस्ट कभी न लगाता
जहां फंसाता, वहीं खुद फंस जाता
कहीं चेहरा सजाता सलमान का
कहीं चेहरा छिपाता अपने मेहमान का
वह आता दो टूक फेसबुक के करता
लुक अपना लड़के से लड़की में बदलता
खूब पसंद पाता
वाह वाह से मन भर जाता
टिप्पणी अपने घर भी ले जाता
अपनी पत्नी से छिपाता
बच्चों को भी नहीं बताता
भरमाता, दो बच्चों का पिता
खुद को सबसे सुंदर समझता
ताकत से अपनी खुद को खुदा समझता
लड़कियों को लुभाता
प्रशंसा में फेक गीत गाता
तब भी किसी को न भाता
चुराकर किसी की कविता
कर अनुवाद अपनी बताता
विचार चुराकर लाता
कभी किसी के, कभी किसी के
अपनी दीवार पर
अपनी टाइम लाईन पर
अपने ब्लॉग पर कतार में
अधेड़ महिलाओं की लाईन लगाना
जहां कन्या स्वरूपा बनता
लाईन पुरुषों की
अधेड़ों की लगी पाता
झुंझलाता, दांत पीसता
गर्व उसका यूं ही पीस जाता।
वह आता दो टूक फेसबुक के करता
कदम अपने ब्लॉग पर लाके धरता
धरती पर कभी न टिकता
जिम में जाकर दम उसका मचलता
सामने आने पर सारा यूं ही निकलता।
वह आता फेसबुक को
फेकबुक बनाता
बनाता या खुद बन जाता
वह जाता
वह जाती
दूर से काया इकहरी
एक ककड़ी, एक खीरा नजर आती
वह चिल्लाती उसे अपना खसम बनाती
फेसबुक पर खाता अपना खोल न पाती
सारी उम्र यूं ही जुल्म उठाती
फेसबुक पर टिप्पणी पाने को तरस जाती।

















