शुक्रिया अविनाश जी। आभार। बहुत बहुत आभार। संदीप जोशी ने अपने पिता की यादों को ताजा करते हुए कई वस्तुओं के बारे में बताया। विशेष कर नारंगी फूलों के बारे में। अक्सर मैं भी दिल्ली से इंदौर इंटरसिटी से आता हूँ, लेकिन जो यात्रा अभी संदीप के साथ की, वो निराली थी।
टेसू के फूल "Fire Of the Jungal." ke naam se bhi jaane jaate haen . मेरी माँ इन्हीं फूलों से रंग बनाती थी और खुशबू बढाने केलिए इत्र भी डालती थी . निरंतरता-गति के प्रतीक हैं ये फूल लगे . बधाई .
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शुक्रिया अविनाश जी। आभार। बहुत बहुत आभार। संदीप जोशी ने अपने पिता की यादों को ताजा करते हुए कई वस्तुओं के बारे में बताया। विशेष कर नारंगी फूलों के बारे में। अक्सर मैं भी दिल्ली से इंदौर इंटरसिटी से आता हूँ, लेकिन जो यात्रा अभी संदीप के साथ की, वो निराली थी।
dhanyavad avinash ji........
टेसू के फूल "Fire Of the Jungal." ke naam se bhi jaane jaate haen .
मेरी माँ इन्हीं फूलों से रंग बनाती थी और खुशबू बढाने केलिए इत्र भी डालती थी .
निरंतरता-गति के प्रतीक हैं ये फूल लगे . बधाई .
धन्यवाद एवं आभार.
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bahut sunder ! avinash ji aapka prastuti ke liye dhanyvaad.
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खिल गई देखो
बगीची की हर कली।