आज 16 मार्च 2010 को दैनिक नवभारत टाइम्स में प्रकाशित चित्र आपकी राय जानना चाह रहा है। कल्पना के घोड़ों को दौड़ाइये तो सही

पार्किंग हो रही है
या हो रही है
कॉमनवेल्थ गेम्स
या उसका
पूर्वाभ्यास ?
अभिव्यक्ति की हिन्दी साहित्य में अनुगूँज और सृजन सहयात्रियों का सेतु
4 comments:
हा हा!! पूर्वाभ्यास पार्किंग का.
वाचस्पति साहब, शकुन और देखने लायक बात यह भी है कि महंगाई के बावजूद हुंडई ने सेंट्रो की मजबूती की गुणवत्ता नहीं घटाई :)
ये आपने बहुत ही टेढा सवाल पूछ लिया हैं. इसका जवाब फिलहाल मेरे पास तो नहीं हैं.
हाँ, याद आया, इसका सही और सटीक जवाब सोनिया गांधी या शीला दीक्षित ही दे सकती हैं.
धन्यवाद.
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NAHINJI,YEH TO dELHI KI SADKON KA AAM SEEN HAI.HAR AADMI YAHI KARNE KI KOSHISH KARTA IKHAYEE DETA HAI,KUCHH AISE LOG 'AKAMYAAB' HO JAATE HAIN.
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खिल गई देखो
बगीची की हर कली।